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कांग्रेस के पुराने वफादार इकबाल अहमद राईनी बोले- ‘तन समर्पित, मन समर्पित, यह जीवन भी कांग्रेस को कुर्बान’

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श्रावस्ती। कांग्रेस के पुराने और समर्पित समर्थकों में शुमार नेता इकबाल अहमद राईनी आज भी पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा को लेकर पूरी तरह कायम हैं। वर्ष 1954 में जन्मे इकबाल अहमद राईनी का परिवार वर्ष 1960 से कांग्रेस विचारधारा से जुड़ा रहा है।

उनके पिता स्वर्गीय मोहम्मद नजीर भी कांग्रेस के समर्थक रहे। जनसंघ के दौर में भी परिवार का झुकाव कांग्रेस की ओर ही बना रहा।इकबाल अहमद राईनी बताते हैं कि होश संभालने के बाद से ही वह कांग्रेस के विचारों से प्रभावित रहे और वर्ष 1980 में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की।


उनका कहना है कि राजनीतिक जीवन में दूसरी पार्टियों की ओर से अवसर और प्रस्ताव मिले, लेकिन उन्होंने कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ा। उनका स्पष्ट संदेश रहा—‘जीना यहां, मरना यहां।’इकबाल अहमद राईनी पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों से भी प्रभावित रहे हैं।

सामाजिक सरोकारों के साथ-साथ सभी धर्मों के धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेना उनकी पहचान रही है। पार्टी की बैठकों और कार्यक्रमों में शामिल होने की उनकी आज भी उतनी ही लालसा है।वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव में टिकट की दावेदारी को लेकर वह कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मिलने भी गए थे, लेकिन उनकी दावेदारी पर बात आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बावजूद उन्होंने पार्टी से दूरी नहीं बनाई।

उनका कहना है कि पार्टी से इतर भी समाज में उनका व्यक्तिगत व्यवहार और लोगों के बीच सम्मान उनकी सबसे बड़ी पूंजी है।ईंट उद्योग से जुड़े इकबाल अहमद राईनी का कहना है कि लंबे समय तक पार्टी के लिए काम करने के बावजूद आज उन्हें कहीं न कहीं ‘छला हुआ’ महसूस होता है, लेकिन कांग्रेस के प्रति उनकी उम्मीदें अभी खत्म नहीं हुई हैं। वह खुद को पार्टी का पुराना और वफादार सिपाही मानते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस पार्टी अपने पुराने और वफादार कार्यकर्ता को प्रत्याशी बनाती है तो वह पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरकर मुकाबला करेंगे।उनका मानना है कि वर्षों की राजनीतिक सक्रियता, समाज में पहचान और सभी वर्गों के लोगों से व्यक्तिगत संबंध उनकी ताकत हैं।

इकबाल अहमद राईनी की राजनीतिक यात्रा में पार्टी के प्रति निष्ठा सबसे प्रमुख रही है। उनका कहना है कि पद और टिकट से ज्यादा महत्वपूर्ण उनके लिए कांग्रेस की विचारधारा और संगठन के साथ उनका वर्षों पुराना रिश्ता है। यही वजह है कि उम्र के इस पड़ाव पर भी वह पार्टी से नई उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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